कलम का साथ

कलम ने लिखी पहचान की लकीरें। दिल में ख्वाहिशें लिए, आँखों में कुछ सपने लिए, जेब खाली लिए, निकले थे घर से पीठ पर जिम्मेवारियों का बस्ता टाँगे… मुक्कमल होने इस मुकाबलों के जहान में। सोचा था कुछ लम्हे तो चुरा ही लेंगे खुद की पहचान में। ना जाने क्या, पर कुछ पाने की चाहत में,…