सुकून का सफरनामा

सुकून का सफरनामा, बड़ी-बड़ी इमारतें-एक छोटा सा घर सुकून ढूंढ़ने निकली घर से , दिल में उम्मीद लिए और जेब में कुछ रूपए लिए। बहुत से बड़े-बड़े शहर देखे, बड़ी-बड़ी इमारतों में भी रही। बदलते मौसम देखे, बदलते लोग देखे, समय गवाया और खुद को हताश पाया। लोगों के आशियानें तो ऊँचे थे, दिखावे उससे भी ऊँचे थे,…