आखिर ज़िन्दगी ही तो है, संभल ही जाएगी।

आखिर ज़िन्दगी ही तो है, संभल ही जाएगी। रास्ता सीधा तो नही, पर घर जाएगी आखिर ज़िन्दगी ही तो है, संभल ही जाएगी।   राहे-मज़िल में मुश्किलें कम तो ना आएगी हर पल, हर दिन, बहुत कुछ सिखाएगी   कभी इस डगर, कभी उस डगर, कभी इस गली, कभी उस गली भी भटकाएगी   कभी…

कितनी प्यारी शख्सियत बनाई है खुदा ने, माँ।

माँ कितनी प्यारी  शख्सियत बनाई है खुदा ने, माँ | जिसका मुक़ाबला ना आज तक कोई कर पाया | जिसने अपनी नींद क़ुर्बान कर मुझे रात भर गोद में झुलाया, खुद गीले बिस्तर पर सौ कर मुझे सूखे पर सुलाया | जिसने सर्द रातों में आँसुओं की झड़ी में बुखार से तपता मेरा माथा सेहराया…

कलम का साथ

कलम ने लिखी पहचान की लकीरें। दिल में ख्वाहिशें लिए, आँखों में कुछ सपने लिए, जेब खाली लिए, निकले थे घर से पीठ पर जिम्मेवारियों का बस्ता टाँगे… मुक्कमल होने इस मुकाबलों के जहान में। सोचा था कुछ लम्हे तो चुरा ही लेंगे खुद की पहचान में। ना जाने क्या, पर कुछ पाने की चाहत में,…

नाम: असिफा; छोटी सी थी मैं, महज आठ साल की…

नाम: असिफा; उम्र: आठ साल; मज़हब: मुस्लिम; मौत का कारण? छोटी सी थी मैं, महज आठ साल की। अम्मी के चेहरे की मुस्कान और अब्बू की जान थी। रोज़ की तरह सुबह हुई, रोज़ की तरह चेहरे पर मुस्कान लिए अंगड़ाइयाँ लेते बिस्तर से उठी थी। तैयार होकर, अम्मी से गले लग कर बकरियाँ चराने…

सुकून का सफरनामा

सुकून का सफरनामा, बड़ी-बड़ी इमारतें-एक छोटा सा घर सुकून ढूंढ़ने निकली घर से , दिल में उम्मीद लिए और जेब में कुछ रूपए लिए। बहुत से बड़े-बड़े शहर देखे, बड़ी-बड़ी इमारतों में भी रही। बदलते मौसम देखे, बदलते लोग देखे, समय गवाया और खुद को हताश पाया। लोगों के आशियानें तो ऊँचे थे, दिखावे उससे भी ऊँचे थे,…

जहन में बसी वो एक तस्वीर

हाल -ऐ –दिल ब्यान करे तो करे किसे? हाल -ऐ -दिल ब्यान करे तो करे कैसे ? एक हलचल सी है दिल में जैसे रहती। बेताबी सी जो बहुत कुछ है कहती। सपना सा है एक जहन में, पूरा जिसे करने की चाहत है रहती एक लो में है ज़िन्दगी जैसे बहती ना दिशा है,…

भीड़ में एक तन्हा सा शहर

करोड़ों को पन्हा देता है पर खुद तन्हा है क्या तन्हा, अजीब सा ये जहान लगता है ना दो गज ज़मीन, ना आसमान दिखता है। ऊँची इमारतों से ऊँचे उठते सपने है ठहरना कोई दो पल को भी कहाँ चाहता है। एक बारिश सी हो रही है मानो ख्वाबों की कुछ चाह कर भी भीग…

जुनून की आँधियाँ बरकरार है

जुनून की आँधियाँ बरकरार है, मुझमें बाकी अभी बहुत जान है|   हालात तो बिगड़ते संभलते रहे, रास्तों की मुश्किलों ने भी लिए बहुत इम्तेहान है पर टूटा नहीं, गिरा नहीं, जो भी हो मुझमें बाकी अभी बहुत जान है|   खोटा सिक्का कह कह कर लोगों ने सताया बहुत, रुलाया बहुत लेकिन मेरा खुदा…

फलक: एक अधूरी सी मंज़िल

मुख़्तसर सा भी कहाँ मिला ये जहान मुस्कुराने को सफरनामा बहुत लम्बा था, पहुंचना फलक तक था और चलना भी तन्हा था रास्ते ने मोड़ लिया कुछ ऐसा मिल गया हमको भी एक साथी अपने जैसा कदम से कदम मिले, हाथों में हाथ हम चले और ना जाने कब दिल से दिल मिले कुछ ही…

ऐ ज़िन्दगी बता तू मुझसे क्या चाह रही है ?

ऐ  ज़िन्दगी बता तू मुझसे क्या चाह रही है ? ना सिमट रही है ना बिखर रही है ना संभल रही है ना लड़खड़ा रही है आखिर तू मुझसे क्या चाह रही है?   हर सुबह वही सूरज चढ़ता है, बिना किसी आहट आँगन रोशन कर छिप अपने घर लौट जाता है शामों पर शामें…